घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का सम्पूर्ण इतिहास, महत्व, कथा और पूजा विधि | Jyotirling.com

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के एलोरा (औरंगाबाद) में स्थित भगवान शिव का पवित्र धाम है और 12 ज्योतिर्लिंगों में अंतिम स्थान रखता है। यहाँ जानिए घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास, पौराणिक कथा, आध्यात्मिक महत्व, पूजा विधि, दर्शन समय और Jyotirling.com के माध्यम से घर बैठे पूजा करवाने की पूरी जानकारी।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का सम्पूर्ण इतिहास, महत्व, कथा और पूजा विधि | Jyotirling.com

परिचय: जहाँ करुणा से प्रकट हुए महादेव

सनातन धर्म में घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग उस दिव्य सत्य का प्रतीक है कि
करुणा, धैर्य और निस्वार्थ भक्ति — शिव को सबसे अधिक प्रिय हैं।

यह ज्योतिर्लिंग सिखाता है कि

जब भक्त बिना अपेक्षा भक्ति करता है, तब स्वयं महादेव प्रकट होते हैं।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग
12 ज्योतिर्लिंगों में अंतिम लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।


घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का नाम और अर्थ

  • ज्योतिर्लिंग का नाम: घृष्णेश्वर (ग्रिश्नेश्वर)

  • अर्थ:

    • घृष्णा = करुणा / दया

    • ईश्वर = परम सत्ता

???? अर्थात करुणामय भगवान शिव

  • शिव का स्वरूप: स्वयंभू ज्योतिर्लिंग

  • विशेष पहचान: करुणा और भक्तवत्सलता का धाम


भौगोलिक स्थिति और स्थान विवरण

  • राज्य: महाराष्ट्र

  • जिला: औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर)

  • स्थान: एलोरा गुफाओं के निकट

  • निकटतम रेलवे स्टेशन: औरंगाबाद

  • निकटतम एयरपोर्ट: औरंगाबाद

यह ज्योतिर्लिंग
विश्व प्रसिद्ध एलोरा गुफाओं के समीप स्थित है।


पौराणिक कथा: घृष्णा देवी की अडिग भक्ति

शिव पुराण के अनुसार,
घृष्णा नामक एक अत्यंत शिव भक्त महिला
प्रतिदिन 101 पार्थिव शिवलिंग बनाकर
उन्हें जल में प्रवाहित किया करती थीं।

उनकी भक्ति से ईर्ष्या कर
अन्य स्त्रियों ने उनके पुत्र की हत्या कर दी।

घृष्णा देवी ने
क्रोध नहीं, बल्कि
करुणा और क्षमा का मार्ग अपनाया
और शिव का ध्यान किया।

उनकी करुणामयी भक्ति से प्रसन्न होकर
भगवान शिव स्वयं यहाँ प्रकट हुए
और इस स्थान पर
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो गए।


घृष्णेश्वर — क्षमा और करुणा का संदेश

यह ज्योतिर्लिंग सिखाता है:

  • प्रतिशोध नहीं, क्षमा

  • क्रोध नहीं, करुणा

  • अपेक्षा नहीं, समर्पण

इसी कारण यह धाम
मानसिक शांति और आत्मिक शुद्धि के लिए प्रसिद्ध है।


ऐतिहासिक महत्व

  • मंदिर का पुनर्निर्माण मालोजी भोसले द्वारा

  • मराठा स्थापत्य शैली

  • लाल पत्थर से निर्मित संरचना

  • सदियों से अखंड शिव आराधना


आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा से:

✔️ मानसिक क्रोध और तनाव का नाश
✔️ पारिवारिक कलह से मुक्ति
✔️ करुणा और सहनशीलता का विकास
✔️ आत्मिक शांति
✔️ शिव कृपा की अनुभूति

यह धाम
भावनात्मक उपचार का केंद्र माना जाता है।


दर्शन और पूजा विधि

???? दर्शन समय

  • प्रातः आरती

  • मध्याह्न पूजा

  • संध्या आरती

  • रात्रि शयन आरती

???? प्रमुख पूजाएँ

  • रुद्राभिषेक

  • महामृत्युंजय जाप

  • विशेष घृष्णेश्वर पूजा

  • शांति एवं समर्पण पूजा


प्रमुख पर्व और उत्सव

  • महाशिवरात्रि

  • श्रावण मास

  • कार्तिक पूर्णिमा


भक्तों की मान्यताएँ और चमत्कार

  • लंबे समय से चला आ रहा मानसिक तनाव समाप्त

  • पारिवारिक विवादों में समाधान

  • करुणा और सकारात्मकता का विकास

  • जीवन में संतुलन


घृष्णेश्वर जाने का सर्वोत्तम समय

  • अक्टूबर से मार्च (सर्वोत्तम)

  • श्रावण मास (पावन, भीड़ अधिक)


Jyotirling.com के माध्यम से घृष्णेश्वर पूजा कैसे कराएँ

यदि आप एलोरा नहीं आ सकते:

✔️ Jyotirling.com आपकी ओर से मंदिर में पूजा करवाता है
✔️ अनुभवी पंडितों द्वारा शास्त्रसम्मत विधि
✔️ संकल्प आपके नाम से
✔️ चढ़ावा एवं प्रसाद सेवा
✔️ पूजा की जानकारी डिजिटल माध्यम से


NRI भक्तों के लिए विशेष सुविधा

  • English coordination

  • International payment options

  • Time-zone aligned puja

  • Trusted on-ground execution


निष्कर्ष

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग यह सिद्ध करता है कि
शिव को क्रोध नहीं, करुणा प्रिय है।

यदि आपकी भक्ति में क्षमा और समर्पण है, तो
महादेव स्वयं प्रकट होते हैं।


???? “करुणामय महादेव के चरणों में समर्पण — घृष्णेश्वर धाम”

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