ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का सम्पूर्ण इतिहास, महत्व, कथा और पूजा विधि | Jyotirling.com
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का पवित्र धाम है, जहाँ पूरा द्वीप ‘ॐ’ के आकार में है। यहाँ जानिए ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास, पौराणिक कथा, पूजा विधि, दर्शन समय और Jyotirling.com के माध्यम से घर बैठे पूजा करवाने की जानकारी।
परिचय: जहाँ स्वयं ‘ॐ’ के रूप में विराजते हैं महादेव
सनातन धर्म में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय चेतना का केंद्र है।
यह वह दिव्य स्थल है जहाँ भगवान शिव ‘ॐ’ — सृष्टि के प्रथम नाद के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
नर्मदा नदी के मध्य स्थित यह पवित्र द्वीप प्राकृतिक रूप से ॐ के आकार में है, जो इसे संपूर्ण विश्व में अद्वितीय बनाता है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का नाम और अर्थ
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ज्योतिर्लिंग का नाम: ओंकारेश्वर
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अर्थ:
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ओंकार = ब्रह्मांड का मूल ध्वनि
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ईश्वर = परम सत्ता
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???? अर्थात वह शिव जो स्वयं ‘ॐ’ स्वरूप हैं।
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शिव का स्वरूप: स्वयंभू, अनादि
भौगोलिक स्थिति और स्थान विवरण
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राज्य: मध्य प्रदेश
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जिला: खंडवा
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नदी: नर्मदा
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स्थान विशेषता: नर्मदा के मध्य ‘ॐ’ आकार का द्वीप
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निकटतम रेलवे स्टेशन: ओंकारेश्वर रोड
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निकटतम एयरपोर्ट: इंदौर (लगभग 80 किमी)
पौराणिक कथा: देवताओं और असुरों का संग्राम
शिव पुराण के अनुसार, एक समय विंध्य पर्वत ने स्वयं को सर्वश्रेष्ठ मानते हुए घमंड करना शुरू कर दिया।
देवताओं ने भगवान शिव से सहायता की प्रार्थना की।
भगवान शिव ने इस स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होकर विन्ध्य पर्वत के अहंकार का नाश किया और समस्त लोकों में संतुलन स्थापित किया।
इसी कारण यहाँ ओंकारेश्वर और अमलेश्वर — दो शिवलिंग पूजे जाते हैं।
ओंकारेश्वर और अमलेश्वर का रहस्य
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ओंकारेश्वर: नर्मदा द्वीप पर स्थित
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अमलेश्वर (ममलेश्वर): दक्षिणी तट पर स्थित
मान्यता है कि दोनों के दर्शन पूर्ण किए बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है।
ऐतिहासिक महत्व
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मंदिर का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों और शिलालेखों में
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कई राजवंशों द्वारा संरक्षण
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स्थापत्य में नागर शैली का प्रभाव
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आज भी वैदिक परंपराओं का पालन
आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा से:
✔️ आत्मिक शुद्धि
✔️ ध्यान और साधना में वृद्धि
✔️ मानसिक संतुलन
✔️ ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति
✔️ कर्म बंधन से मुक्ति
यह स्थान योग, ध्यान और आत्मबोध के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।
दर्शन और पूजा विधि
???? दर्शन समय
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प्रातःकाल आरती
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मध्याह्न पूजा
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संध्या आरती
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रात्रि शयन आरती
???? प्रमुख पूजाएँ
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रुद्राभिषेक
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महामृत्युंजय जाप
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नर्मदा जल से अभिषेक
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विशेष ओंकारेश्वर पूजा
प्रमुख पर्व और उत्सव
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महाशिवरात्रि
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श्रावण मास
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कार्तिक पूर्णिमा
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सावन सोमवार
भक्तों की मान्यताएँ और चमत्कार
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ध्यान में स्थिरता
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मानसिक विकारों से मुक्ति
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साधना में प्रगति
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जीवन में सकारात्मक ऊर्जा
ओंकारेश्वर जाने का सर्वोत्तम समय
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अक्टूबर से मार्च (उत्तम)
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श्रावण मास (अत्यंत पावन, अधिक भीड़)
Jyotirling.com के माध्यम से ओंकारेश्वर पूजा कैसे कराएँ
यदि आप ओंकारेश्वर स्वयं नहीं आ सकते:
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निष्कर्ष
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग वह स्थान है जहाँ ध्वनि, ऊर्जा और चेतना एक हो जाते हैं।
यदि आपकी साधना सच्ची है, तो
ॐ स्वयं आपका मार्गदर्शन करता है।
???? “ॐकार स्वरूप महादेव के चरणों में श्रद्धा अर्पित करें”
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