भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का सम्पूर्ण इतिहास, महत्व, कथा और पूजा विधि | Jyotirling.com

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के सह्याद्रि पर्वतों में स्थित भगवान शिव का पवित्र धाम है, जहाँ शिव ने त्रिपुरासुर के वंशज असुर भीम का संहार किया था। यहाँ जानिए भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का इतिहास, पौराणिक कथा, पूजा विधि, दर्शन समय और Jyotirling.com के माध्यम से घर बैठे पूजा करवाने की संपूर्ण जानकारी।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का सम्पूर्ण इतिहास, महत्व, कथा और पूजा विधि | Jyotirling.com

परिचय: जहाँ शिव बने रक्षक और संहारक

सनातन धर्म में भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग उस स्थान का प्रतीक है जहाँ
भगवान शिव ने धर्म की रक्षा हेतु असुर शक्ति का अंत किया

सह्याद्रि पर्वतों की घनी वनराशि और शुद्ध वातावरण के बीच स्थित यह धाम
भक्ति, शक्ति और प्रकृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।


भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का नाम और अर्थ

  • ज्योतिर्लिंग का नाम: भीमाशंकर

  • अर्थ:

    • भीम = शक्तिशाली / भयंकर

    • शंकर = कल्याणकारी शिव

???? अर्थात वह शिव जिन्होंने भीम नामक असुर का संहार किया

  • शिव का स्वरूप: स्वयंभू ज्योतिर्लिंग


भौगोलिक स्थिति और स्थान विवरण

  • राज्य: महाराष्ट्र

  • जिला: पुणे

  • पर्वत श्रृंखला: सह्याद्रि (पश्चिमी घाट)

  • नदी उद्गम: भीमा नदी

  • निकटतम रेलवे स्टेशन: पुणे

  • निकटतम एयरपोर्ट: पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

यह क्षेत्र वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आता है और अत्यंत शांत है।


पौराणिक कथा: असुर भीम का अंत

शिव पुराण के अनुसार, त्रिपुरासुर के पुत्र असुर भीम ने
भयंकर तपस्या कर असीम शक्ति प्राप्त कर ली थी।

उसके अत्याचारों से देवता और ऋषि त्रस्त हो गए।
देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान शिव इस स्थान पर प्रकट हुए
और भीषण युद्ध के बाद असुर भीम का संहार किया।

युद्ध के पश्चात शिव ने यहाँ
ज्योतिर्लिंग रूप में निवास करने की घोषणा की


भीमा नदी और शिव कृपा

मान्यता है कि:

  • असुर भीम के रक्त से भीमा नदी का उद्गम हुआ

  • यह नदी आज भी भक्तों के लिए पवित्र मानी जाती है


ऐतिहासिक महत्व

  • मंदिर का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है

  • स्थापत्य में नागर और हेमाडपंथी शैली का प्रभाव

  • मराठा काल में विशेष संरक्षण

  • आज भी आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ा धाम


आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की पूजा से:

✔️ भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
✔️ शत्रु बाधा निवारण
✔️ साहस और आत्मविश्वास
✔️ रोग और मानसिक तनाव से मुक्ति
✔️ जीवन में स्थिरता

यह धाम रक्षक शिव के रूप में पूजित है।


दर्शन और पूजा विधि

???? दर्शन समय

  • प्रातः आरती

  • मध्याह्न पूजा

  • संध्या आरती

  • रात्रि शयन आरती

???? प्रमुख पूजाएँ

  • रुद्राभिषेक

  • महामृत्युंजय जाप

  • विशेष भीमाशंकर पूजा

  • संकट निवारण पूजा


प्रमुख पर्व और उत्सव

  • महाशिवरात्रि

  • श्रावण मास

  • कार्तिक पूर्णिमा

श्रावण मास में यह क्षेत्र विशेष रूप से हरित और दिव्य हो जाता है।


भक्तों की मान्यताएँ और चमत्कार

  • शत्रु भय से मुक्ति

  • अचानक आई बाधाओं का समाधान

  • साहस में वृद्धि

  • प्रकृति से आध्यात्मिक जुड़ाव


भीमाशंकर जाने का सर्वोत्तम समय

  • अक्टूबर से मार्च (सर्वोत्तम)

  • श्रावण मास (अत्यंत पावन, भारी वर्षा)


Jyotirling.com के माध्यम से भीमाशंकर पूजा कैसे कराएँ

यदि आप भीमाशंकर स्वयं नहीं जा सकते:

✔️ Jyotirling.com आपकी ओर से मंदिर में पूजा करवाता है
✔️ अनुभवी पंडितों द्वारा शास्त्रसम्मत विधि
✔️ संकल्प आपके नाम से
✔️ चढ़ावा एवं प्रसाद सेवा
✔️ पूजा की जानकारी डिजिटल माध्यम से


NRI भक्तों के लिए विशेष सुविधा

  • English coordination

  • International payment options

  • Time-zone aligned puja

  • Trusted on-ground execution


निष्कर्ष

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग यह स्मरण कराता है कि
जहाँ भय है, वहाँ शिव का संरक्षण भी है।

यदि आपकी श्रद्धा सच्ची है, तो
महादेव स्वयं आपकी रक्षा करते हैं।


???? “रक्षक शिव के चरणों में समर्पण — भीमाशंकर धाम”

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