मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का सम्पूर्ण इतिहास, महत्व, कथा और पूजा विधि | Jyotirling.com
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम पर्वत पर स्थित भगवान शिव का अत्यंत पवित्र धाम है, जहाँ शिव और शक्ति एक साथ पूजे जाते हैं। यहाँ जानिए मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का पौराणिक इतिहास, आध्यात्मिक महत्व, पूजा विधि, दर्शन समय और Jyotirling.com के माध्यम से घर बैठे पूजा करवाने की जानकारी।
परिचय: जहाँ शिव और शक्ति का मिलन होता है
सनातन धर्म में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग वह दिव्य स्थान है जहाँ भगवान शिव (मल्लिकार्जुन) और माता पार्वती (भ्रामरांबा देवी) एक साथ विराजमान हैं।
यह धाम केवल शिव उपासना का केंद्र नहीं, बल्कि शिव-शक्ति के पूर्ण संतुलन का प्रतीक है।
श्रीशैलम पर्वत पर स्थित यह ज्योतिर्लिंग भक्तों को भक्ति, शक्ति और करुणा — तीनों का अनुभव कराता है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का नाम और अर्थ
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ज्योतिर्लिंग का नाम: मल्लिकार्जुन
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अर्थ:
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मल्लिका = सुगंधित पुष्प (चमेली)
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अर्जुन = शिव का नाम
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???? अर्थात वह शिव जो पुष्पों से पूजित हैं।
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शिव का स्वरूप: स्वयंभू ज्योतिर्लिंग
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शक्ति पीठ: भ्रामरांबा देवी (शक्तिपीठ)
भौगोलिक स्थिति और स्थान विवरण
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राज्य: आंध्र प्रदेश
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जिला: नंद्याल (पूर्व में कर्नूल क्षेत्र)
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स्थान: श्रीशैलम पर्वत
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नदी: कृष्णा
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निकटतम रेलवे स्टेशन: मार्कापुर रोड
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निकटतम एयरपोर्ट: हैदराबाद (लगभग 200 किमी)
घने जंगलों और पर्वतीय क्षेत्र के बीच स्थित यह धाम अत्यंत शांत और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करता है।
पौराणिक कथा: पुत्र मोह और शिव-शक्ति का करुण स्वरूप
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय एक बार क्रोधित होकर कैलाश छोड़कर श्रीशैलम पर्वत पर तपस्या करने चले गए।
पुत्र के वियोग में व्याकुल होकर शिव-पार्वती स्वयं श्रीशैलम पहुँचे और वहीं मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो गए।
यह कथा बताती है कि:
भगवान शिव केवल संहारक नहीं, बल्कि करुणामय पिता भी हैं।
मल्लिकार्जुन और भ्रामरांबा — शिव-शक्ति की संयुक्त उपासना
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मल्लिकार्जुन: शिव स्वरूप
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भ्रामरांबा देवी: शक्ति स्वरूप
यह भारत के उन दुर्लभ स्थलों में से है जहाँ:
✔️ 12 ज्योतिर्लिंग
✔️ 18 महाशक्ति पीठ
एक ही परिसर में स्थित हैं।
ऐतिहासिक महत्व
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मंदिर का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों और शिलालेखों में
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चालुक्य, काकतीय और विजयनगर साम्राज्य का संरक्षण
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दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली का सुंदर उदाहरण
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आज भी वैदिक और तांत्रिक परंपराओं का पालन
आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पूजा से:
✔️ वैवाहिक जीवन में संतुलन
✔️ पारिवारिक कलह से मुक्ति
✔️ मानसिक स्थिरता
✔️ शक्ति और आत्मबल की प्राप्ति
✔️ शिव-शक्ति कृपा
यह स्थान विशेष रूप से दांपत्य और पारिवारिक सुख के लिए प्रसिद्ध है।
दर्शन और पूजा विधि
???? दर्शन समय
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प्रातः आरती
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मध्याह्न पूजा
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संध्या आरती
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रात्रि शयन आरती
???? प्रमुख पूजाएँ
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रुद्राभिषेक
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महामृत्युंजय जाप
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शिव-शक्ति संयुक्त पूजा
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विशेष मल्लिकार्जुन पूजा
प्रमुख पर्व और उत्सव
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महाशिवरात्रि
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श्रावण मास
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नवरात्रि (भ्रामरांबा देवी)
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कार्तिक पूर्णिमा
भक्तों की मान्यताएँ और चमत्कार
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वैवाहिक बाधाओं का निवारण
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संतान सुख
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मानसिक और भावनात्मक संतुलन
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नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
मल्लिकार्जुन जाने का सर्वोत्तम समय
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अक्टूबर से मार्च (सर्वोत्तम)
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महाशिवरात्रि और नवरात्रि (विशेष महत्व)
Jyotirling.com के माध्यम से मल्लिकार्जुन पूजा कैसे कराएँ
यदि आप श्रीशैलम नहीं जा सकते:
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NRI भक्तों के लिए विशेष सुविधा
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Trusted on-ground execution
निष्कर्ष
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग यह सिखाता है कि
जहाँ शिव हैं, वहाँ शक्ति भी है — और जहाँ दोनों साथ हों, वहाँ पूर्णता है।
यदि आपकी श्रद्धा सच्ची है, तो
शिव-शक्ति स्वयं आपका कल्याण करते हैं।
???? “शिव और शक्ति के चरणों में समर्पण — मल्लिकार्जुन धाम”
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